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मई, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

रात की एक रात :)

सिलवट सिलवट चाँद पड़ा है, हर कोने पे तारे हैं , कुछ उल्काएं हैं जो गिरी हैं बिस्तर के सिरहाने से , ओस की बूंदे सुलग रही हैं बिस्तर के पाए के पास , तकिये के नीचे इक मिल्की वे कि साँसे अटकी हैं... जाने किसके साथ गुजारी रात ने अपनी रात यहाँ ...! :D