सिलवट सिलवट चाँद पड़ा है, हर कोने पे तारे हैं , कुछ उल्काएं हैं जो गिरी हैं बिस्तर के सिरहाने से , ओस की बूंदे सुलग रही हैं बिस्तर के पाए के पास , तकिये के नीचे इक मिल्की वे कि साँसे अटकी हैं... जाने किसके साथ गुजारी रात ने अपनी रात यहाँ ...! :D
हँस के बीमार कर दिया देखो, तुम ने अच्छी भली उदासी को -स्वप्निल तिवारी