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रोगन

दीवारों से
टेक लगाकर
गर कुछ देर
आराम करो ,
रंग छूट कर
कपड़ों पर
आ लगता है....

तेरी रूह पे
इक दिन जानां
मेरा रोगन
लगा मिलेगा ,
कब से तू भी
मेरे दिल पर
टेक लगाकर
बैठी है ............ !

टिप्पणियाँ

pallavi trivedi ने कहा…
सच में बड़ी ख़ास नज़्म है....लिखा भी बहुत खूब है!
Amitraghat ने कहा…
वाह ! बहुत बढ़िया लिखा है...."
Alpana Verma ने कहा…
'तेरी रूह पे
इक दिन जानां
मेरा रोगन
लगा मिलेगा '
-क्या बात है!
बहुत गहरी बात कह गए इस नज़्म में.
-आभार
:):):)

पहले भी पढ़ी है..ये रोगन वाली नज़्म...बहुत बढ़िया टेक लगाये बैठी है...अपने रंग में रंग दो तो क्या बात है.....
प्रिया ने कहा…
kamaal hai....gulzaar ko kalam mein ghol kar pee liya kya...andaze baya waisa hi hain....Rogan pasand aaya :-)
नज़्म के हर लफ्ज़ पर चिपका है मेरा रोग़न ए दिल
क्या कहूँ कैसा है मेरे ज़हन ओ दिल का आज हाल
लाली मेरे लाल की, जित देखूँ तित लाल
लाली देखन मैं चली, मैं भी हो गई लाल...
डॉ .अनुराग ने कहा…
वाकई ये नज़्म एक खास अहसास में डुबोती है ....
..यार तुम्हारा ब्लॉग खुलने में कुछ परेशानी दे रहा है .इसलिए तुम्हारी पिछली पोस्टो पर कमेन्ट नहीं कर पाया .जरा देखो कहाँ नाराजगी है उसे ....
बेनामी ने कहा…
bahut hi achhi pasand aayi...
yun hi likhte rahein...
intzaar rahega agli rachnaon ka....
----------------------------------------
mere blog par is baar
इंतज़ार...
jaroor aayein...
http://i555.blogspot.com/
bahut bahut shuqriya aap sab ka.. :)


@anurag ji
are sahab abhi blogging ke bare me itna nahi jaan paya hun ki kaun si prob ho to kaise thiuk hogi..buhuhu.. :(....baharhaal aap tab bhi aaye..bahut bahut shuqriya aaapka..
लास्ट लाईन के साथ ये इमोट ’:)’ रखना भूल गया..
बहुत खूब..

और ब्लाग के लिये कोई हल्का फ़ुल्का टेम्प्लेट यूज करो.. इमेज भी काफ़ी भारी लग रही है.. सच मे काफ़ी देर मे लोड होता है.. काफ़ी ओवरलोडेड है शायद..
@parul ji

thanku so much mam


@pankaj
hey thanx for helping me out dear... aur nazm pe aane ka alag se shuqriyaa... :)
Avinash Chandra ने कहा…
तेरी रूह पे
इक दिन जानां
मेरा रोगन
लगा मिलेगा

Khubsurat... behad khubsurat

Dard hai seela seela sa...par achchha hai

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