दीवारों से
टेक लगाकर
गर कुछ देर
आराम करो ,
रंग छूट कर
कपड़ों पर
आ लगता है....
तेरी रूह पे
इक दिन जानां
मेरा रोगन
लगा मिलेगा ,
कब से तू भी
मेरे दिल पर
टेक लगाकर
बैठी है ............ !
टेक लगाकर
गर कुछ देर
आराम करो ,
रंग छूट कर
कपड़ों पर
आ लगता है....
तेरी रूह पे
इक दिन जानां
मेरा रोगन
लगा मिलेगा ,
कब से तू भी
मेरे दिल पर
टेक लगाकर
बैठी है ............ !
टिप्पणियाँ
इक दिन जानां
मेरा रोगन
लगा मिलेगा '
-क्या बात है!
बहुत गहरी बात कह गए इस नज़्म में.
-आभार
पहले भी पढ़ी है..ये रोगन वाली नज़्म...बहुत बढ़िया टेक लगाये बैठी है...अपने रंग में रंग दो तो क्या बात है.....
क्या कहूँ कैसा है मेरे ज़हन ओ दिल का आज हाल
लाली मेरे लाल की, जित देखूँ तित लाल
लाली देखन मैं चली, मैं भी हो गई लाल...
..यार तुम्हारा ब्लॉग खुलने में कुछ परेशानी दे रहा है .इसलिए तुम्हारी पिछली पोस्टो पर कमेन्ट नहीं कर पाया .जरा देखो कहाँ नाराजगी है उसे ....
yun hi likhte rahein...
intzaar rahega agli rachnaon ka....
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mere blog par is baar
इंतज़ार...
jaroor aayein...
http://i555.blogspot.com/
@anurag ji
are sahab abhi blogging ke bare me itna nahi jaan paya hun ki kaun si prob ho to kaise thiuk hogi..buhuhu.. :(....baharhaal aap tab bhi aaye..bahut bahut shuqriya aaapka..
और ब्लाग के लिये कोई हल्का फ़ुल्का टेम्प्लेट यूज करो.. इमेज भी काफ़ी भारी लग रही है.. सच मे काफ़ी देर मे लोड होता है.. काफ़ी ओवरलोडेड है शायद..
thanku so much mam
@pankaj
hey thanx for helping me out dear... aur nazm pe aane ka alag se shuqriyaa... :)
इक दिन जानां
मेरा रोगन
लगा मिलेगा
Khubsurat... behad khubsurat
Dard hai seela seela sa...par achchha hai