सूरज नयी सुबह की दहलीज़ पे खड़ा है और एक नज़्म मेरी दहलीज़ पे, तुम आओ कुण्डी खोलो दोनों तरफ उजाला हो...!
हँस के बीमार कर दिया देखो, तुम ने अच्छी भली उदासी को -स्वप्निल तिवारी
हँस के बीमार कर दिया देखो, तुम ने अच्छी भली उदासी को -स्वप्निल तिवारी
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