सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

ghazal

जब भी दिख जाएँ वो हैरत करना
ऐसे रंगों की हिफ़ाज़त करना

جب بھی دیکھ جائیں وہ، حیرت کرنا
ایسے..رنگوں کی حفاظت کرنا


उस का मुझ से यूँ ही लड़ लेना और
घर की चीजों से शिकायत करना

اس کا مجھ سے یوں ہی لڑ لینا اور
گھر کی چیزوں سے شکایات کرنا


काम ये कोई भी कर देगा पर
इश्क! तुम मेरी वज़ाहत करना

کام یہ کوئی بھی کر دیگا پر
عشق ! تم میری وضاحت کرنا

इस से पहले के उसे देखो तुम
ठीक से सीख लो हैरत करना

اس سے پہلے کہ اسے دیکھو تم
ٹھیک سے سیکھ لو حیرت کرنا


मेरे ता'वीज़ में जो काग़ज़ है
उस पे लिक्खा है मुहब्बत करना

میرے تعویز میں جو کاغذ ہے
اس پے لکّھا ہے.. محبّت کرنا


रोकना... उस को बना कर बातें
कुछ हो गर तो शिकायत करना

روکنا اس کو.. بنا کر باتیں
کچھ نہ ہو گر تو شکایات کرنا

-Swapnil Tiwari-

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

भोर

सूरज नयी सुबह की दहलीज़ पे खड़ा है और एक नज़्म मेरी दहलीज़ पे, तुम आओ कुण्डी खोलो दोनों तरफ उजाला हो...!

अपनी जिद हूँ, आप अड़ा हूँ

जाने क्यूं इस ज़िद पे अड़ा हूँ अपने मुक़ाबिल आप खड़ा हूँ चाँद रहा हूँ माँ की खातिर यानी बनने में बिगड़ा हूँ मैं अपने मन के कमरे में जाने क्यूं बेहोश पड़ा हूँ मैं ही भीष्म हूँ, मैं ही अर्जुन मैं ही बन कर तीर गड़ा हूँ दूर तलक उखड़ी है मिट्टी मैं जब भी जड़ से उखड़ा हूँ दिल में वो उतना ही आये शहरों से जितना झगड़ा हूँ “आतिश” मन की आंच बढ़ा लूं? तुम कहते हो कच्चा घड़ा हूँ

Earth hour (नज़्म/نظم)

मेरी ख़ाहिश है हर महीने में रात इक इस तरह की हो जिसमें शह्र की सारी बत्तियां इक साथ एक घंटे को चुप करा दी जाएँ शह्र के लोग छत पे भेजे जाएँ और तारों से जब नज़र उलझे तब अँधेरे का हुस्न उन पे खुले कहकशाँ टूट कर गिरे सब पे सब की आँखों के ज़ख्म भर जाएँ …. मुझ को गर इंतेख़ाब करना हो मैं अमावास की रात को चुन लूँ चाँद की ग़ैरहाज़िरी में ये बात साफ़ शायद ज़ियादा हो हम पे ‘ अपना नुक़सान कर लिया है बहुत हमने ईजाद रौशनी कर के ’` میری خواہش ہے ہر مہینے میں رات اک اس طرح کی ہو جس میں شہر کی ساری بتیاں اک ساتھ ایک گھنٹے کو چپ کرا دی جایں شہر کے لوگ چھت پے بھیجے جایں ان کی تاروں سے جب نظر الجھے تب اندھیرے کا حسن ان پے کھلے کہکشاں ٹوٹ کر گری ان پر انکی آنکھوں کے زخم بھر جائیں مجھ کو گر انتخاب کرنا ہو میں اماوس کی رات کو چن لوں چاند کی غیر حاضری میں یہ بات صاف شاید زیادہ ہو ہم پر اپنا نقصان کر لیا ہے بہت ہم نے ایجاد روشنی کر کے -Swapnil-