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दुआ का मलबा हटा के देखें/ دوا کا ملبہ ہٹا کے دیکھیں


मुहम्मद अल्वी साहब की नज़्र/ محمّد علوی صاحب کی نذر



दुआ का मलबा हटा के देखें
तमाम चेहरे ख़ुदा के देखें

دوا کا ملبہ ہٹا کے دیکھیں
تمام چہرے خدا کے دیکھیں

यही रखें चाँद और सूरज
ज़मीं दुबारा बना के देखें

یہی رکھیں چاند اور سورج
زمیں دوبارہ بنا کے دیکھیں

लगा दें बोसे को पंख और फिर
तुम्हारी जानिब उड़ा के देखें

لگا دیں بوسے کو پنکھ اور پھر
تمہاری جانب اڑا کے دیکھیں

चलें रिहर्सल में हादसे के
सड़क पे ख़ुद को बिछा के देखें

چلیں ریہرسل میں حادثے کے
سڑک پے خود کو بچھا کے دیکھیں

फलांग जाएँ तमाम लम्हे
घड़ी को आगे बढ़ा के देखें

فلانگ جائیں تمام لمحے
گھڑی کو آگے بڑھا کے دیکھیں

वहाँ भी बन जाए बात शायद
वहाँ भी बातें बना के देखें

وہاں بھی بن جائے بات شاید
وہاں بھی باتیں بنا کے دیکھیں

तुम्हारी ख़ुशबू करें बरामद
तमाम पहलू हवा के देखें

تمھاری خوشبو کریں برآمد
تمام پہلو ہوا کے دیکھیں

तुम्हारी आवाज़ से बिछड़कर
ज़रा कभी ख़ुद को गा के देखें

تمہاری آواز سے بچھڑ کر
ذرا کبھی خود کو گا کے دیکھیں

ग़ज़ल है 'अल्वी' की नज़्र स्वप्निल
तो क्यों उन को सुना के देखें

غزل ہے 'علوی' کی سوپنل'
تو کیوں نہ ان کو سنا کے دیکھیں



~Swapnil~


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