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ہاں دھنک کے رنگ سارے کھل گئے/हाँ धनक के रंग सारे खुल गए


ہاں دھنک کے رنگ سارے کھل گئے
مجھ پے تیرے سب اشارے کھل گئے

हाँ धनक के रंग सारे खुल गए
मुझे पे तेरे सब इशारे खुल गए

ایک تو ہم کھیل میں بھی تھے نۓ
اس پے پتے بھی ہمارے کھل گئے

एक तो हम खेल में भी थे नए
उस पे पत्ते भी हमारे खुल गए

جھیل میں آنکھوں کی تم اترے ہی تھے
اور خابوں کے شکارے کھل گئے

झील में आँखों की तुम उतरे ही थे
और ख़ाबों के शिकारे खुल गए

نرم ہی تھی یاد کی ہر پنکھڑی
پھر بھی میرے زخم سارے کھل گئے

नर्म ही थी याद की हर पंखुड़ी
फिर भी मेरे ज़ख्म सारे खुल गए

مجھکو جکڑے تھے کئی بندھن مگر
تیرے بندھن کے سہارے کھل گئے

मुझको जकड़े थे कई बंधन मगर
तेरे बंधन के सहारे खुल गए
-swapnil

टिप्पणियाँ

Fursatnama ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Fursatnama ने कहा…
Wahhh! Aatish saa'b you are on a roll!
"एक तो हम खेल में भी थे नए, उस पे पत्ते भी हमारे खुल गए"...hamaare jaise straightforward logon ki dukhbhari gaatha hai! :(
एक एक शायर इतनी खूबसूरती से गढा गया है...वाह!
बहुत बहुत शुक्रिया... :)

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