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मौसमे-हिज्र का हर वार संभाले हुए हैं/موسم ہجر کا ہر وار سنبھالے ہوئے ہیں

मौसमे-हिज्र का हर वार संभाले हुए हैं
हम तिरी याद की बौछार संभाले हुए हैं
موسم ہجر کا ہر وار سنبھالے ہوئے ہیں
ہم تری یاد کی بوچھار سنبھالے ہوئے ہیں
दश्त के हो चुके सारे कि जो दीवाने थे
हुस्ने-जानाँ को तो हुशियार संभाले हुए हैं
دشت کے ہو چکے سارے کہ جو دیوانے تھے
حسن جاناں کو تو ہوشیار سنبھالے ہوئے ہیں
इश्क़ और मैं तो हमआहंग हैं कब से कि मुझे
उसकी ऊँगली से जुड़े तार संभाले हुए हैं
عشق اور میں تو ہم آہنگ ہیں کب سے کہ مجھے
اسکی انگلی سے جوڈے تار سنبھالے ہوئے ہیں
तुम गुज़र सकते हो कतरा के सफ़ीने वालो
हम तो दरिया हैं सो मँझधार संभाले हुए हैं
تم گزر سکتے ہو کترا کے سفینے والو
ہم تو دریا ہیں سو منجھدھار سنبھالے ہوئے ہیں
वो किसी और फ़साने ही से हैं वाबस्ता
मुझ-कहानी को जो किरदार संभाले हुए हैं
وو کسی اور فسانے ہی سے ہیں وابستہ
مجھ کہانی کو جو کردار سنبھالے ہوئے ہیں
गिर के टूटेगी अभी एक छनाके के साथ
इक हंसी जिसको ये रुख़सार संभाले हुए हैं
گر کے ٹوتگی ابھی ایک چھناکے کے ساتھ
اک ہنسی جس کو یہ رخسار سنبھلے ہوئے ہیں
नींव से शोर सा उठता है इक ‘हैया हो’ का
ये वो साये हैं जो दीवार संभाले हुए हैं
نیو سے شور سا اٹھتا ہے اک ہےیا ہو کا
یہ وو سائے ہیں جو دیوار سنبھالے ہوئے ہیں
इक ख़ज़ाना सा तहे-आब दबा है जानां
दीदा-ए-तर तिरा दीदार संभाले हुए हैं
اک خزانہ سا تہ آب دبا ہے جاناں
دیدۂ تر ترا دیدار سنبھالے ہوئے ہیں 
-swapnil-

टिप्पणियाँ

Fursatnama ने कहा…
आह! चुन चुन के मोती पिरोये हैं ...हर शेर बेहद उम्दा है!

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