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मैं धीमा राग हूं भाता है ये उतार मुझे/میں دھیما راگ ہوں بھاتا ہے یہ اتار مجھے

मैं धीमा राग हूं भाता है ये उतार मुझे सदा की ओट में आ ख़ामुशी पुकार मुझे घुमाता है जो लड़कपन का रेगज़ार मुझे उठाये फिरता है काँधे पे इक ग़ुबार मुझे न तैरना ही बने और न डूब ही पाऊं हर एक मौज किये जाय दरकिनार मुझे कुछ ऐसा दर्द है जी चाहता है तेरी याद वो धुन बजाये करे अब जो तार तार मुझे नहीं है दूसरी गाड़ी कोई भी तेरे बाद यूँ बीच नींद में ऐ ख़्वाब मत उतार मुझे ज़रा ख़याल भर आता है एक शै का और दबोच लेते हैं फिर उस के इश्तेहार मुझे میں دھیما راگ ہوں بھاتا ہے یہ اتار مجھے صدا کی اوٹ میں آ خامشی پکار مجھے   گھماتا ہے جو لڈکپن کا ریگزار مجھے اٹھائے پھرتا ہے کاندھے پہ اک غبار مجھے نہ تیرنا ہی بنے اور نہ ڈوب ہی پاؤں ہر ایک موج کئے جائے درکنار مجھے کچھ ایسا درد ہے جی چاہتا ہے تیری یاد وہ دھن بجائے کرے اب جو تار تار مجھے نہیں ہے دوسری گاڑی کوئی بھی تیرے بعد یوں بیچ نیند میں اے خواب مت اتار مجھے ذرا خیال بھر آتا ہے ایک شے کا اور دبوچ لیتے ہیں پھ...

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यूँ ही एड़ी पे घूमना है मुझे/ یوں ہی ایڑی پہ گھومنا ہے مجھے

यूँ ही एड़ी पे घूमना है मुझे अब ये नुक़ता ही दायरा है मुझे रतजगा हूं कि नींद हूं उस की उस ने आँखों में रख लिया है मुझे मैं हूं तस्वीर इक ख़मोशी की एक आवाज़ ने रचा है मुझे उस से पहले भी गुम हुआ हूं मैं उस ने इस बार खो दिया है मुझे मेरे साहिल से शाम को सूरज देर तक यूँ ही देखता है मुझे मेरी हर इक कला से वाक़िफ़ है चाँद बरसों से जानता है मुझे मेरा दिल ही है पासबां फिर भी तेरे दर पर टटोलता है मुझे मैं भला था तिरे तख़य्युल में तू ने लिख कर , मिटा दिया है मुझे किस जगह नींद है पता है मगर इक बुरा ख्व़ाब रोकता है मुझे बढ़ता जाता है दायरा - ए - सराब क्या ये सहरा डुबो रहा है मुझे कैसा ग़म है ! कि अपनी आँखों से आंसुओं ने गिरा दिया है मुझे یوں ہی ایڑی پہ گھومنا ہے مجھے اب یہ نقطہ ہی دائرہ ہے مجھے رتجگا ہوں کہ نیند ہوں اس کی اس نے آنکھوں میں رکھ لیا ہے مجھے میں ہوں تصویر اک خموشی کی ایک آواز نے رچا ہے مجھے اس سے...

एक बंजारे की आवारा कहानी में हूं मैं/ ایک بنجارے کی آوارہ کہانی میں ہوں میں

ایک بنجارے کی آوارہ کہانی میں ہوں میں یعنی اک موج ہوں اور رقصو روانی میں ہوں میں   تو فلک ہے میری جاناں تو شفق ہوں میں بھی     دن کے توہفے میں ہوں اور شب کی نشانی میں ہوں میں تم محبّت میں ادا کار  کی کیوں اے ہو اب کہ کردار کسی اور کہانی میں ہوں میں اونگھتے وقت نظر آیا تھا مجھ کو وہ سراب آنکھ مندتے ہی یہ پایا تھا کہ پانی میں ہوں میں سوچتا ہوں کے میرا عشق امر ہے جاناں یہ الگ بات ترے کوچہ فانی مے ہوں میں एक बंजारे की आवारा कहानी में हूं मैं यानी इक मौज हूं और रक़्सो-रवानी में हूं मैं तू फ़लक है मिरी जानां तो शफ़क़ हूं मैं भी दिन के तोहफे में हूं और शब की निशानी में हूं मैं तुम मुहब्बत में अदाकार की क्यूँ आये हो ‘अब के किरदार किसी और कहानी में हूं मैं’ ऊंघते वक़्त नज़र आया था मुझको वो सराब आँख मुंदते ही ये पाया था के पानी में हूं मैं सोचता हूं के मिरा इश्क़ अमर है जानां ये अलग बात तिरे कूचा ए फ़ानी में हूं मैं

दबी है कोई दुखती रग खुदाया/ دبی ہے کوئی دکھتی رگ خدایا

दबी है कोई दुखती रग खुदाया ज़मीं ने आसमां सर पर उठाया دبی ہے کوئی دکھتی رگ خدایا زمیں نے آسماں سر پر اٹھایا वो चलता जा रहा था दूर मुझसे घना कुहरा था चारो सिम्त छाया وہ چلتا جا رہا تھا دور مجھ سے گھانا کوہرا تھا چاروں سمت چھایا ये किस की याद-सी है दिल में मेरे ये वीरानों को है किसने सजाया یہ کس کی یاد سی ہے دل میں میرے یہ ویرانوں کو کسنے ہے سجایا अकेला था मैं उस नाटक में शायद कि हर किरदार मैंने ही निभाया اکیلا تھا میں اس ناٹک میں شاید کہ ہر کردار میں نے ہی نبھایا ये दुनिया आ गयी सकते में सारी लतीफ़ा ज़िंदगी नें जब सुनाया یہ دنیا آ گئی سکتے میں ساری لطیفہ زندگی نے جب سنایا न हो फिर जागने में देर मुझको इसी इक बात नें शब भर जगाया نہ ہو پھر جاگنے میں دیر مجھ کو اسی اک بات نے شب بھر جگایا तुम्हारे एक दिन को जज़्ब करके ये ‘ आतिश ’ ज़िंदगी भर जगमगाया تمھارے ایک دن کو جذب کر کے یہ آتش زندگی بھر جگمگایا