शुक्रवार, 23 अप्रैल 2010

लो नज़्म हुई जानां ..!!

कुछ शोख इशारों से
कुछ फूल बहारों से
दरिया के किनारों से
चंदा से सितारों से
कोई नज़्म नहीं बनती ..

कुछ शोख इशारे , तुम
कुछ फूल बहारें , तुम
दरिया के किनारे तुम
ये चाँद सितारे ,तुम
लो नज़्म हुई जानां ..!!

7 टिप्‍पणियां:

वन्दना ने कहा…

sundar bhav.

sangeeta swarup ने कहा…

हो गयी ना नज़्म ????????????

सब कुछ तुम ही तुम हो का भाव दिखाती खूबसूरत नज़्म....

:):)

imemyself ने कहा…

आतिश

तुम्हारी "तुम" से हम, तुम्हारी नज़्म में मिले, तुम और तुम्हारी तुम ....हम बने रहो...इस तारा तारा आकाश में!

SAMVEDANA KE SWAR ने कहा…

आज अपनी बात कहने के लिए गुरुदेव के लफ्ज़ उधार लेने की नौबत आ गई...
“कब से बैठा हुआ हूँ मैं जानम
सादे काग़ज़ पे लिखके नाम तेरा
बस तेरा नाम ही मुकम्मल है
इससे बेहतर भी नज़्म क्या होगी.”

अमिताभ मीत ने कहा…

वाह ! बहुत खूब !!

Shekhar Suman ने कहा…

bahut hi behtareen rachna...
achhi lagi...
aur aapne meri kavita par ek sawal poocha hai....
main bas yahi kehna chahoonga ki shayad yahi prem ka parinaam hai..
yeh ek aisa waqt hota hai jab duniya ke saare rishte chhote lagte hain...haalanki ye uchit nahi hai lekin kya karein ......hota yahi hai....

स्वप्निल कुमार 'आतिश' ने कहा…

@vandna ji

:) thanku so much

@mumma

hehe..han ho gayi nazm .. luv u

@imemyself
aap ki duaon ka bahut bahut shuqriya

@samvedna ke swar ji
aahmere liye to saubhagya ki bat hai ..ki koi gulzar chacha ke shabd meri nazm ke zawaab me kahe..shuqriya


@amitabh ji

shuqriyaaaa sir


@shekhar suman ji

thanku so much ji ..