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एक बंजारे की आवारा कहानी में हूं मैं/ ایک بنجارے کی آوارہ کہانی میں ہوں میں

ایک بنجارے کی آوارہ کہانی میں ہوں میں یعنی اک موج ہوں اور رقصو روانی میں ہوں میں   تو فلک ہے میری جاناں تو شفق ہوں میں بھی     دن کے توہفے میں ہوں اور شب کی نشانی میں ہوں میں تم محبّت میں ادا کار  کی کیوں اے ہو اب کہ کردار کسی اور کہانی میں ہوں میں اونگھتے وقت نظر آیا تھا مجھ کو وہ سراب آنکھ مندتے ہی یہ پایا تھا کہ پانی میں ہوں میں سوچتا ہوں کے میرا عشق امر ہے جاناں یہ الگ بات ترے کوچہ فانی مے ہوں میں एक बंजारे की आवारा कहानी में हूं मैं यानी इक मौज हूं और रक़्सो-रवानी में हूं मैं तू फ़लक है मिरी जानां तो शफ़क़ हूं मैं भी दिन के तोहफे में हूं और शब की निशानी में हूं मैं तुम मुहब्बत में अदाकार की क्यूँ आये हो ‘अब के किरदार किसी और कहानी में हूं मैं’ ऊंघते वक़्त नज़र आया था मुझको वो सराब आँख मुंदते ही ये पाया था के पानी में हूं मैं सोचता हूं के मिरा इश्क़ अमर है जानां ये अलग बात तिरे कूचा ए फ़ानी में हूं मैं

दबी है कोई दुखती रग खुदाया/ دبی ہے کوئی دکھتی رگ خدایا

दबी है कोई दुखती रग खुदाया ज़मीं ने आसमां सर पर उठाया دبی ہے کوئی دکھتی رگ خدایا زمیں نے آسماں سر پر اٹھایا वो चलता जा रहा था दूर मुझसे घना कुहरा था चारो सिम्त छाया وہ چلتا جا رہا تھا دور مجھ سے گھانا کوہرا تھا چاروں سمت چھایا ये किस की याद-सी है दिल में मेरे ये वीरानों को है किसने सजाया یہ کس کی یاد سی ہے دل میں میرے یہ ویرانوں کو کسنے ہے سجایا अकेला था मैं उस नाटक में शायद कि हर किरदार मैंने ही निभाया اکیلا تھا میں اس ناٹک میں شاید کہ ہر کردار میں نے ہی نبھایا ये दुनिया आ गयी सकते में सारी लतीफ़ा ज़िंदगी नें जब सुनाया یہ دنیا آ گئی سکتے میں ساری لطیفہ زندگی نے جب سنایا न हो फिर जागने में देर मुझको इसी इक बात नें शब भर जगाया نہ ہو پھر جاگنے میں دیر مجھ کو اسی اک بات نے شب بھر جگایا तुम्हारे एक दिन को जज़्ब करके ये ‘ आतिश ’ ज़िंदगी भर जगमगाया تمھارے ایک دن کو جذب کر کے یہ آتش زندگی بھر جگمگایا 

इश्क़ की रुत से हम आहंग/عشق کی رت سے ہم آہنگ

इश्क़ की रुत से हम आहंग दिल के अंदर एक मलंग शब की क़ैद से भागने को चाँद की ओट में एक सुरंग इक मछली की राह बनें धारों में इस बात पे जंग अब्र की पीठ पे फैला है छूट रहा है चाँद का रंग सँकरी सँकरी किरणें हैं धनक ! तुम्हारा घर है तंग मांझा अब इस ज़िद पर है हाथ कटे या कटे पतंग नींद में ख़ाब का कंकर फेंक सुब्ह तलक फैलेगी तरंग عشق کی رت سے ہم آہنگ دل کے اندر ایک ملنگ شب کی قید سے بھاگنے کو چاند کی اوٹ میں ایک سرنگ اک مچھلی کی راہ بنیں دھاروں میں اس بات پی جنگ ابر کی پیٹھ پہ پھیلا ہے چھوٹ رہا ہے چاند کا رنگ سنکری سںکری کرنے ہیں دھنک! تمہارا گھر ہے تنگ مانجھا اب اس زد پر ہے ہاتھ کٹے یا کٹے پتنگ نیند میں خواب کا کنکر پھینک صبح تلک پھیلے گی ترنگ 

दरीचा/دریچہ

घुटन ही घुटन है फ़ज़ा जैसे इक बोझ उठाये हुए है ये आधा उजाला तो बेहोश सा है अधूरा अँधेरा भी बेहिस पड़ा है यहां के सवेरों में शामें मिली हैं तो रातों में किरनों की किरचें मिलेंगी घुटन ही घुटन है ये तस्वीर तेरी जो दीवार पर है इसे क्या हटा दूँ ? कि मुमकिन है पीछे दरीचा छुपा हो ..... گھٹن ہی گھٹن ہے فضا جیسے اک بوجھ اٹھائے ہوئے ہے یہ آدھ اجالا تو بے ہوش سا ہے ادھورا اندھیرا بھی بے حس پڑا ہے یہاں کے سویروں میں شامیں ملی ہیں تو راتوں میں کرنوں کی کرچیں ملیں گی گھٹن ہی گھٹن ہے یہ تصویر تیری جو دیوار پر ہے اسے کیا ہٹا دوں ؟ کہ ممکن ہے پیچھے دریچہ چھپا ہو....... 

नदी की लय पे ख़ुद को गा रहा हूँ/ندی کی لے پہ خود کو گا رہا ہوں

नदी की लय पे ख़ुद को गा रहा हूँ मैं गहरे और गहरे जा रहा हूँ चुरा लो चाँद तुम उस सिम्त छुप कर मैं शब को इस तरफ़ उलझा रहा हूँ वो सुर में सुर मिलाना चाहती है मैं अपनी धुन बदलता जा रहा हूँ मुझे ये ख़्वाब आया था कि जग कर मैं अपनी नींद पर पछता रहा हूँ पड़ा हूँ ज़िन्दगी के जाम में मैं मज़ा ये है पिघलता जा रहा हूँ जज़ीरे पर अजब सी गूँज है ये तेरी ही तरह मैं तन्हा रहा हूँ छिड़कता जा रहा हूँ याद उसकी शबे-फुरक़त ! तुझे महका रहा हूँ न जाने ज़िन्दगी है क़र्ज़ किसका अदा करते हुए घबरा रहा हूँ यही मौक़ा है ख़ारिज कर दूँ खुद को मैं अपने आप को दुहरा रहा हूँ  ندی کی لے پہ خود کو گا رہا ہوں میں گہرے، اور گہرے جا رہا ہوں چُرا لو چاند تم اُس سمت چھپ کر میں شب کو اس طرف الجھا رہا ہوں وہ سُر میں سُر ملانا چاہتی ہے میں اپنی دھن بدلتا جا رہا ہوں مجھے یہ خواب آیا تھا کہ جگ کر میں اپنی نیند پر پچھتا رہا ہوں پڑا ہوں زندگی کے جام میں میں مزہ یہ ہے پگھلتا جا رہا ہوں یہی موقع ہے خارج کر دوں خود کو میں اپنے آپ کو دہرا رہا ہوں

کسی نے بھی نہ مری ٹھیک ترجمانی کی/किसी ने भी न मिरी ठीक तर्जुमानी की

किसी ने भी न मिरी ठीक तर्जुमानी की धुंआ धुआँ हैं फ़ज़ा मेरी हर कहानी की चलो ! निकालो मिरे पाँव में चुभा तारा ज़मीं की सत्ह तुम्हीं ने तो आसमानी की ये वक़्त लंबे दिनों का है सो ये रातें अब बढ़ा रही हैं उदासी ही रातरानी की मैं रो के उट्ठा तो आँखों से रेत झड़ने लगी कि तिशनगी ही वसीयत है खारे पानी की नदी किनारे लगा देती थी , सो क्या करते किसी तरह से भंवर हमने ज़िंदगानी की तिरा ख़याल हुआ कैनवस पे मेहमाँ कल तमाम रंगों ने मिलजुल के मेज़बानी की गुनाहे-इश्क़ किया और कोई सज़ा न हुई! ज़ुरुर तुम ने सुबूतों से छेड़खानी की کسی نے بھی نہ مری ٹھیک ترجمانی کی دھواں دھواں ہے فضا میری ہر کہانی کی چلو ! نکالو مرے پاؤں میں چبھا تارا زمیں کی سطح تمہی نے تو آسمانی کی یہ وقت لمبے دنوں کا ہے سو یہ راتیں اب بڑھا رہی ہیں اداسی ہی رات رانی کی میں رو کے اٹھا تو آنکھوں سے ریت جھڑنے لگی کہ تشنگی ہی وصیت ہے کھارے پانی کی ترا خیال ہوا کینوس پہ مہماں کل تمام رنگوں نے مل جل کے میزبانی کی گناھ عشق کیا اور کوئی سزا نہ ہوئی زرور تم نے...

चांदनी मुझ से भी कभी बिखरे/چاندنی مجھ سے بھی کبھی بکھرے

चांदनी मुझ से भी कभी बिखरे दाग़ मुझ में हैं चाँद से गहरे चोट करते हुए छुपा दी थी अपनी तस्वीर घाव में तेरे धूप की इक नदी में उतरा हूँ ले के पलकों पे ख़्वाब के क़तरे ये शरर ही कहानियां हैं मिरी उड़ते हैं जो अलाव से मेरे वरना मरकज़ नहीं मैं नुक़्ता हूँ मुझको रहते हैं दायरे घेरे एक रनवे पे दौड़ते हैं हम और रोज़े-अज़ल के हैं उतरे कब तलक मैं हरा रहूँगा भला चार जानिब हैं काठ के चेहरे उस के सब राज़दार डूब गए शाम के राज़ थे बड़े गहरे शोर करते हैं जिस्म की तह में तेरे ख़ामोश लम्स के क़तरे बीच रस्ते में इक सराय मिली अश्क गालों पे आ के टुक ठहरे چاندنی مجھ سے بھی کبھی بکھرے داغ میرے ہیں چاند سے گہرے چوٹ کرتے ہوئے چھپا دی تھی اپنی تصویر گھاؤ میں تیرے دھوپ کی اک ندی میں اترا ہوں لے کے پلکوں پہ خواب کے قطرے یہ شرر ہی کہانیاں ہیں مری اڑتے ہیں جو الاؤ سے میرے ورنہ مرکز نہیں میں نقطہ ہوں مجھ کو رہتے ہیں دائرے گھیرے ایک رن وے پہ دوڑتے ہیں ہم اور روزے ازل کے ہیں اترے کب تلک میں ہرا راہوں گا بھلا چار جانب ہیں کاٹھ کے چہرے اس کے سب رازدار ڈوب گئے شام کے راز تھے ب...