सिलवट सिलवट चाँद पड़ा है,
हर कोने पे तारे हैं ,
कुछ उल्काएं हैं जो गिरी हैं
बिस्तर के सिरहाने से ,
ओस की बूंदे सुलग रही हैं
बिस्तर के पाए के पास ,
तकिये के नीचे इक
मिल्की वे कि साँसे अटकी हैं...
जाने किसके साथ गुजारी
रात ने अपनी रात यहाँ ...! :D
हर कोने पे तारे हैं ,
कुछ उल्काएं हैं जो गिरी हैं
बिस्तर के सिरहाने से ,
ओस की बूंदे सुलग रही हैं
बिस्तर के पाए के पास ,
तकिये के नीचे इक
मिल्की वे कि साँसे अटकी हैं...
जाने किसके साथ गुजारी
रात ने अपनी रात यहाँ ...! :D
टिप्पणियाँ
इसे 09.05.10 की चर्चा मंच (सुबह 06 बजे) में शामिल किया गया है।
http://charchamanch.blogspot.com/
रात ने अपनी रात यहाँ ...!
वाह! बहुत सुन्दर तरीके से आपने इन शब्दों को सजाया है!
बिस्तर के पाए के पास ,
बहुत कोमल से एहसास....खूबसूरत नज़्म..
बिस्तर के पाए के पास ...
Guru...kya kaatil nazm kahi hai...
hatts off !
achha laga padhkar...
yun hi likhte rahein...
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mere blog mein is baar...
जाने क्यूँ उदास है मन....
jaroora aayein
regards
http://i555.blogspot.com/
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कौन हो सकता है चर्चित ब्लॉगर?
पत्नियों को मिले नार्को टेस्ट का अधिकार?
:):):)
raat ka chehra yaad aaya...yeh nazm padhke kaise sharma gayi hogi..:P
khair..
bahuut khoobsoorat nazm hai
- Taru