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एक बंजारे की आवारा कहानी में हूं मैं/ ایک بنجارے کی آوارہ کہانی میں ہوں میں


ایک بنجارے کی آوارہ کہانی میں ہوں میں
یعنی اک موج ہوں اور رقصو روانی میں ہوں میں

 تو فلک ہے میری جاناں تو شفق ہوں میں بھی   
دن کے توہفے میں ہوں اور شب کی نشانی میں ہوں میں

تم محبّت میں ادا کار  کی کیوں اے ہو
اب کہ کردار کسی اور کہانی میں ہوں میں

اونگھتے وقت نظر آیا تھا مجھ کو وہ سراب
آنکھ مندتے ہی یہ پایا تھا کہ پانی میں ہوں میں

سوچتا ہوں کے میرا عشق امر ہے جاناں
یہ الگ بات ترے کوچہ فانی مے ہوں میں

एक बंजारे की आवारा कहानी में हूं मैं
यानी इक मौज हूं और रक़्सो-रवानी में हूं मैं

तू फ़लक है मिरी जानां तो शफ़क़ हूं मैं भी
दिन के तोहफे में हूं और शब की निशानी में हूं मैं

तुम मुहब्बत में अदाकार की क्यूँ आये हो
‘अब के किरदार किसी और कहानी में हूं मैं’

ऊंघते वक़्त नज़र आया था मुझको वो सराब
आँख मुंदते ही ये पाया था के पानी में हूं मैं

सोचता हूं के मिरा इश्क़ अमर है जानां
ये अलग बात तिरे कूचा ए फ़ानी में हूं मैं

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