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यूँ ही एड़ी पे घूमना है मुझे/ یوں ہی ایڑی پہ گھومنا ہے مجھے

यूँ ही एड़ी पे घूमना है मुझे
अब ये नुक़ता ही दायरा है मुझे

रतजगा हूं कि नींद हूं उस की
उस ने आँखों में रख लिया है मुझे

मैं हूं तस्वीर इक ख़मोशी की
एक आवाज़ ने रचा है मुझे

उस से पहले भी गुम हुआ हूं मैं
उस ने इस बार खो दिया है मुझे

मेरे साहिल से शाम को सूरज
देर तक यूँ ही देखता है मुझे

मेरी हर इक कला से वाक़िफ़ है
चाँद बरसों से जानता है मुझे

मेरा दिल ही है पासबां फिर भी
तेरे दर पर टटोलता है मुझे

मैं भला था तिरे तख़य्युल में
तू ने लिख कर, मिटा दिया है मुझे

किस जगह नींद है पता है मगर
इक बुरा ख्व़ाब रोकता है मुझे

बढ़ता जाता है दायरा--सराब
क्या ये सहरा डुबो रहा है मुझे

कैसा ग़म है! कि अपनी आँखों से
आंसुओं ने गिरा दिया है मुझे


یوں ہی ایڑی پہ گھومنا ہے مجھے
اب یہ نقطہ ہی دائرہ ہے مجھے

رتجگا ہوں کہ نیند ہوں اس کی
اس نے آنکھوں میں رکھ لیا ہے مجھے

میں ہوں تصویر اک خموشی کی
ایک آواز نے رچا ہے مجھے

اس سے پہلے بھی گم ہوا ہوں میں
اس نے اس بار کھو دیا ہے مجھے

میرے ساحل سے شام کو سورج
دیر تک یوں ہی دیکھتا ہے مجھے

میری ہر اک کلا سے واقف ہے
چاند برسوں سے جانتا ہے مجھے

میرا دل ہی ہے پاسباں پھر بھی
تیرے در پر ٹٹولتا ہے مجھے

میں بھلا تھا ترے تخیّل میں
تونے لکھ کر مٹا دیا ہے مجھے

بڑھتا جاتا ہے دائرہ_ سراب
کیا یہ صحرا ڈبو رہا ہے مجھے

کس جگہ نیند ہے پتا ہے مگر
اک برا خواب روکتا ہے مجھے

ایسا غم ہے کہ اپنی آنکھوں سے
آنسوؤں نیں گرا دیا ہے مجھے 

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